समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग (Dedicated OBC Commission

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समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग (Dedicated OBC Commission

समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग (Dedicated OBC Commission

 उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग (Dedicated OBC Commission) का गठन सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित "ट्रिपल टेस्ट" (Triple Test) की शर्तों को पूरा करने के लिए किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय निकाय चुनावों में पिछड़ों के आरक्षण की पात्रता और प्रतिशत तय करना है।

यहाँ इसकी गठन प्रक्रिया और कार्यप्रणाली की चरणबद्ध जानकारी दी गई है:

चरण 1: वैधानिक आधार और आवश्यकता

सर्वोच्च न्यायालय ने 'कृष्ण मूर्ति बनाम भारत संघ' और 'विकास किशनराव गवली' मामलों में स्पष्ट किया था कि स्थानीय निकायों में OBC आरक्षण तब तक नहीं दिया जा सकता जब तक राज्य सरकार "ट्रिपल टेस्ट" की औपचारिकताएं पूरी नहीं करती। इसी के तहत एक समर्पित आयोग का गठन अनिवार्य होता है।

चरण 2: आयोग का स्वरूप और संरचना

राज्य सरकार एक अधिसूचना (Notification) जारी कर आयोग के सदस्यों की नियुक्ति करती है।

 * अध्यक्ष: आमतौर पर उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश इसके अध्यक्ष होते हैं।

 * सदस्य: इसमें सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी, कानूनी विशेषज्ञ या समाजशास्त्री शामिल होते हैं जिन्हें पिछड़े वर्गों के मुद्दों की गहरी समझ हो।

 * सचिवालय: आयोग को अपना काम करने के लिए सरकार द्वारा कर्मचारी और संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं।

चरण 3: डेटा का संग्रहण (Empirical Data Collection)

यह आयोग का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है। आयोग राज्य के सभी जिलों का दौरा करता है और निम्नलिखित जानकारी जुटाता है:

 * स्थानीय निकायों (नगर निगम, नगरपालिका, पंचायत) में पिछड़े वर्ग की जनसंख्या का अनुपात।

 * राजनीतिक प्रतिनिधित्व की वर्तमान स्थिति (क्या वे पर्याप्त मात्रा में चुनाव जीत पा रहे हैं?)।

 * विभिन्न क्षेत्रों में पिछड़ेपन की प्रकृति और प्रभाव।

चरण 4: आरक्षण की सीमा का निर्धारण

डेटा का विश्लेषण करने के बाद, आयोग अपनी सिफारिशें तैयार करता है। इसमें दो मुख्य बातों का ध्यान रखा जाता है:

 * आनुपातिक आरक्षण: पिछड़ेपन के आधार पर आरक्षण का प्रतिशत तय करना।

 * 50% की सीमा: यह सुनिश्चित करना कि अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का कुल आरक्षण मिलाकर 50% से अधिक न हो।

चरण 5: रिपोर्ट प्रस्तुत करना

आयोग अपनी विस्तृत रिपोर्ट और सिफारिशें राज्य सरकार को सौंपता है। इस रिपोर्ट में जिलेवार और निकायवार पिछड़ों की स्थिति का कच्चा चिट्ठा होता है।

चरण 6: कैबिनेट की मंजूरी और कानूनी कार्यान्वयन

 * राज्य कैबिनेट रिपोर्ट का अध्ययन करती है और उसे स्वीकार करती है।

 * रिपोर्ट के आधार पर नगर पालिका/पंचायत अधिनियम में आवश्यक संशोधन किए जाते हैं।

 * इसके बाद ही सीटों के आरक्षण (Chakranukram/Rotation) की नई सूची जारी की जाती है।

संक्षिप्त सारांश (ट्रिपल टेस्ट फॉर्मूला)

| स्टेप | कार्य |

|---|---|

| 1 | राज्य के भीतर पिछड़ेपन की प्रकृति की जांच के लिए समर्पित आयोग बनाना। |

| 2 | आयोग द्वारा स्थानीय निकायवार आनुभविक डेटा (Empirical Data) एकत्र करना। |

| 3 | कुल आरक्षण को 50% की कुल सीमा के भीतर रखना। |

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